छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा निर्देश: थानों में CCTV हमेशा चालू रखने के आदेश

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि थानों में लगाए गए सीसीटीवी कैमरे केवल दिखावे के लिए नहीं हैं। इनका उद्देश्य पुलिस की कार्रवाई में पारदर्शिता बनाए रखना और आम लोगों के अधिकारों की रक्षा करना है।
हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस थानों में लगे सभी सीसीटीवी कैमरे हर समय चालू हालत में रहने चाहिए। कैमरों से रिकॉर्ड होने वाली फुटेज को भी तय अवधि तक सुरक्षित रखना जरूरी है। अगर कैमरे खराब मिलते हैं या रिकॉर्डिंग सुरक्षित नहीं रहती है तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
यह मामला गौरेला थाना क्षेत्र के एनडीपीएस एक्ट से जुड़े एक प्रकरण की सुनवाई के दौरान सामने आया। मामले में चार आरोपियों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की थीं। सुनवाई के दौरान सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई। कोर्ट ने माना कि रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के आधार पर ट्रायल कोर्ट के आदेश में दखल देने का पर्याप्त आधार नहीं है। इसके बाद चारों आरोपियों की याचिकाएं खारिज कर दी गईं।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से मुख्य सचिव ने कोर्ट को बताया कि प्रदेश के पुलिस थानों में सीसीटीवी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए करीब 102 करोड़ रुपये की योजना तैयार की गई है। इसके तहत राज्य के लगभग 550 पुलिस थानों में आधुनिक सीसीटीवी सिस्टम विकसित किया जाएगा।
सरकार के अनुसार नई व्यवस्था में कैमरों की गुणवत्ता, रिकॉर्डिंग सिस्टम और स्टोरेज क्षमता को बेहतर बनाया जाएगा। सीसीटीवी फुटेज को 18 महीने तक सुरक्षित रखने की व्यवस्था होगी। इसके बाद तय अवधि पूरी होने पर फुटेज को सिस्टम से अपने आप डिलीट करने की व्यवस्था लागू की जाएगी।
हाईकोर्ट ने कहा कि किसी आपराधिक मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया में सीसीटीवी फुटेज अहम साक्ष्य बन सकती है। इसलिए इसका सुरक्षित रहना बेहद जरूरी है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कैमरे सिर्फ थाने के मुख्य दरवाजे या बाहर तक सीमित नहीं होने चाहिए। पुलिस थाने के महत्वपूर्ण हिस्सों में भी प्रभावी निगरानी की व्यवस्था होनी चाहिए।
अदालत के अनुसार सीसीटीवी व्यवस्था मजबूत होने से पुलिस की कार्यप्रणाली में जवाबदेही बढ़ेगी। किसी शिकायत या विवाद की स्थिति में रिकॉर्डिंग से वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सकती है। इससे जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता भी आएगी।
मामले में आरोपियों के मोबाइल नंबर से जुड़े कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी सीडीआर भी ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड में मौजूद थे। हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी इन दस्तावेजों का इस्तेमाल अपने बचाव में कर सकते हैं। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया में मौजूद सभी वैध साक्ष्यों को उचित महत्व दिया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद प्रदेश के पुलिस थानों में सीसीटीवी व्यवस्था को लेकर अधिकारियों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। कोर्ट ने साफ संदेश दिया है कि कैमरे सिर्फ लगाए जाना पर्याप्त नहीं है। उनका लगातार चालू रहना और रिकॉर्डिंग का सुरक्षित संरक्षण भी उतना ही जरूरी है। यह व्यवस्था पुलिस में पारदर्शिता और आम नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।



