MPD-2047 को जमीन पर उतारने की तैयारी, DDA 3 महीने में करेगा 20 से ज्यादा बैठकें

नई दिल्ली। मास्टर प्लान फॉर दिल्ली-2047 (MPD-2047) को जमीन पर उतारने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने तैयारियां तेज कर दी हैं। DDA अगले करीब तीन महीनों में 20 से ज्यादा बैठकें आयोजित करेगा। इन बैठकों में दिल्ली के विकास से जुड़े अलग-अलग मुद्दों पर संबंधित पक्षों से सीधे सुझाव लिए जाएंगे।
सांसदों से लेकर किसानों तक से होगी चर्चा
DDA की इन बैठकों में सांसदों, विधायकों, सरकारी विभागों, उद्योग संगठनों, आर्किटेक्ट, प्लानर, RWA, किसानों और जमीन मालिकों को शामिल किया जाएगा। बैठक में TOD, हाई डेंसिटी कॉरिडोर, लैंड पूलिंग, पुनर्विकास और आवास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी।
DDA का मकसद MPD-2047 की योजनाओं को केवल दस्तावेज तक सीमित रखने के बजाय उन्हें जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करना है।
यमुना के कायाकल्प पर भी रहेगा फोकस
बैठकों में यमुना के कायाकल्प, हरित क्षेत्र बढ़ाने, विरासत स्थलों के संरक्षण और दिल्ली की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी चर्चा होगी। शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए एजुकेशन और मेडिकल हब विकसित करने को लेकर भी संबंधित पक्षों से सुझाव लिए जाएंगे।
इसके अलावा ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी और दूसरे क्षेत्रों के पुनर्विकास से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी।
दिल्ली सरकार का किफायती आवास पर जोर
दिल्ली के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने MPD-2047 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा है कि दिल्ली में जमीन सीमित है, लेकिन राजधानी के विकास का विजन सीमित नहीं है।
सरकार का लक्ष्य किफायती आवास उपलब्ध कराने, पुरानी और जर्जर कॉलोनियों का पुनर्विकास करने, कनेक्टिविटी सुधारने और हरित क्षेत्रों का विस्तार करने के साथ दिल्ली को आधुनिक और टिकाऊ राजधानी बनाना है।
मेट्रो के 500 मीटर दायरे में TOD
MPD-2047 के तहत मेट्रो स्टेशनों के 500 मीटर के दायरे में 2,000 वर्गमीटर के भूखंडों पर ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति लागू करने की बात कही गई है।
इसका उद्देश्य मेट्रो के आसपास ऐसा विकास करना है, जिससे लोग आसानी से पैदल मेट्रो स्टेशन तक पहुंच सकें और निजी वाहनों पर निर्भरता कम हो। TOD परियोजनाओं के आसपास डेवलपर्स को 18 मीटर चौड़ी सड़कों के लिए जमीन छोड़नी होगी।
‘जहां झुग्गी, वहीं मकान’ पर जोर
झुग्गी बस्तियों के पुनर्वास के लिए सरकार ने इन-सीटू पुनर्वास की नीति पर जोर दिया है। इसके तहत लोगों को उनकी मौजूदा जगह से दूर ले जाने के बजाय उसी स्थान पर बेहतर आवास उपलब्ध कराने की योजना है।
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यमुना फ्लडप्लेन में नए निर्माण पर रोक
हरित क्षेत्र को बढ़ाने के लिए MPD-2047 में यमुना के फ्लडप्लेन में नए निर्माण की अनुमति नहीं देने का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा अरावली क्षेत्र में लंग स्पेस विकसित करने की योजना है।
DDA की ओर से 52 किलोमीटर लंबे साइकिल ट्रैक और 200 किलोमीटर से ज्यादा पार्क कनेक्टर्स विकसित करने की भी परिकल्पना की गई है। साहिबी और नजफगढ़ ड्रेन जैसे नालों के किनारे रिवर कनेक्टर पैच विकसित करने की योजना भी मास्टर प्लान का हिस्सा है।
DDA के मुताबिक, MPD-2047 को सफल बनाने के लिए दिल्ली के विकास से जुड़े सभी पक्षों की भागीदारी जरूरी है। इसी उद्देश्य से अगले तीन महीनों में होने वाली बैठकों में सुझावों और जमीनी जरूरतों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।



