टोल प्लाजा शिकायतों पर सरकार सख्त, तीन साल में 85 हजार से अधिक शिकायतें; 146 नोटिस और करोड़ों का जुर्माना

देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा से जुड़ी शिकायतों को लेकर सरकार ने संसद में विस्तृत जानकारी दी है। सरकार के अनुसार पिछले तीन वर्षों में टोल प्लाजा पर कर्मचारियों के दुर्व्यवहार, मारपीट, लंबी प्रतीक्षा और अन्य समस्याओं से संबंधित 85 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें अधिकांश मामलों का निपटारा कर दिया गया है, जबकि बहुत कम शिकायतें अभी लंबित हैं।
सरकार ने बताया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले टोल ऑपरेटरों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की गई है। अब तक 146 शो-कॉज नोटिस जारी किए गए हैं, 5.53 करोड़ रुपये का आर्थिक जुर्माना लगाया गया है और तीन टोल ऑपरेटरों के अनुबंध भी समाप्त किए गए हैं।
आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक शिकायतें दिल्ली से दर्ज हुईं। इसके बाद गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश का स्थान रहा। इसके अलावा कर्नाटक, पंजाब, बिहार, केरल, मध्य प्रदेश, असम और आंध्र प्रदेश से भी बड़ी संख्या में शिकायतें प्राप्त हुईं। सरकार का कहना है कि अधिकांश शिकायतों का समयबद्ध समाधान किया गया है और संबंधित एजेंसियों को आवश्यक निर्देश भी दिए गए हैं।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बताया कि शिकायतें 1033 हेल्पलाइन, पीजी पोर्टल, राजमार्ग यात्रा ऐप, ईमेल और लिखित माध्यम से प्राप्त हुईं। इनमें कर्मचारियों के व्यवहार, मारपीट और टोल प्लाजा पर अत्यधिक प्रतीक्षा जैसी समस्याएं प्रमुख रहीं।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी सड़क पर टोल वसूली तभी शुरू की जाती है, जब उसे संचालन के लिए तैयार घोषित कर आवश्यक प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाता है। यदि सड़क का चौड़ीकरण या उन्नयन कार्य जारी रहता है तो निर्धारित नियमों के अनुसार टोल शुल्क में छूट दी जाती है।
मंत्रालय के अनुसार सभी टोल प्लाजा पर एम्बुलेंस, क्रेन, पेट्रोलिंग वाहन, शौचालय, पेयजल, पर्याप्त रोशनी, सीसीटीवी कैमरे, फास्टैग व्यवस्था, सूचना बोर्ड और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना अनिवार्य है। इन व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी की जाती है और किसी भी प्रकार की लापरवाही मिलने पर संबंधित एजेंसियों के खिलाफ अनुबंध की शर्तों के अनुसार कार्रवाई की जाती है।

