105 साल की उम्र में मिली स्थायी आजादी, सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के दोषी रसिक मंडल को जेल से किया रिहा

सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे 105 वर्षीय रसिक चंद्र मंडल को स्थायी रूप से जेल से रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत ने उनकी उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए उनकी अंतरिम रिहाई को अब स्थायी कर दिया। अदालत के इस फैसले के बाद रसिक मंडल अपने जीवन के बाकी दिन परिवार के साथ बिता सकेंगे।
रसिक चंद्र मंडल पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के रहने वाले हैं। उनका जन्म 1920 में हुआ था। उन्हें 1988 में हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उस समय उनकी उम्र 68 वर्ष थी। दिसंबर 1994 में अदालत ने उन्हें हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
सजा के खिलाफ रसिक मंडल ने कलकत्ता हाईकोर्ट में अपील की थी, लेकिन करीब 24 साल बाद 2018 में हाईकोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। हालांकि, 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी अपील को खारिज कर दिया था।
बढ़ती उम्र के साथ रसिक मंडल को स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियां होने लगीं। इसके बाद उन्हें जेल से निकालकर पश्चिम बंगाल के बालुरघाट स्थित सुधार गृह में रखा गया। साल 2020 में उनके बेटे के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर उम्र और खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए समय से पहले रिहाई की मांग की गई।
2024 में मिली थी अंतरिम राहत
सुप्रीम कोर्ट ने 29 नवंबर 2024 को उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें अंतरिम जमानत या पैरोल पर रिहा करने का आदेश दिया था। इसके बाद वह जेल से बाहर थे। अब 21 अगस्त 2026 को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने उनकी उम्र को ध्यान में रखते हुए अंतरिम रिहाई को स्थायी रिहाई में बदलने का फैसला किया।
कोर्ट ने पूछा- उन्हें स्थायी रिहाई क्यों न दी जाए?
सुनवाई के दौरान पीठ ने उनकी उम्र को लेकर सवाल उठाया कि जब रसिक मंडल 105 वर्ष के हो चुके हैं, तो उन्हें दोबारा जेल भेजने की जरूरत क्यों होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि उनकी उम्र को देखते हुए उन्हें रिहा न करने का कोई उचित कारण नजर नहीं आता।
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वकील ने भी कहा कि अदालत यह निर्देश दे सकती है कि उन्हें इस मामले में दोबारा जेल न भेजा जाए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 29 नवंबर 2024 के अंतरिम आदेश को अंतिम रूप देते हुए रसिक मंडल की स्थायी रिहाई का आदेश दिया।
इस फैसले के साथ 105 वर्षीय रसिक चंद्र मंडल को अब उम्रकैद की सजा के बावजूद दोबारा जेल नहीं भेजा जाएगा और वह अपने परिवार के साथ जीवन के शेष दिन बिता सकेंगे।



