अनाथ होने के बाद संघर्ष से इतिहास रचने तक पहुंचीं आयशा वहाब, बनीं पहली अफगान-अमेरिकी सांसद

39 वर्षीय आयशा वहाब ने अमेरिकी राजनीति में इतिहास रच दिया है। कैलिफोर्निया में हुए विशेष चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद वह अमेरिकी कांग्रेस की पहली अफगान-अमेरिकी सदस्य बन गई हैं। उन्होंने अपनी ही पार्टी की मेलिसा हर्नांडेज को 53.1 प्रतिशत वोटों से हराया। यह सीट पूर्व सांसद एरिक स्वैलवेल के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी।
मुश्किलों से भरा रहा बचपन
आयशा वहाब का जन्म क्वींस में हुआ था। बचपन में ही उन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया। उनके पिता की हत्या कर दी गई थी, जबकि कुछ समय बाद उनकी मां का भी निधन हो गया। इसके बाद कैलिफोर्निया के बे एरिया के एक दंपति ने उन्हें गोद लिया। आगे चलकर उन्होंने पॉलिटिकल साइंस में पढ़ाई की और MBA के साथ सोशल वर्क में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की।
2011 में परिवार पर आया आर्थिक संकट
साल 2011 में आयशा और उनके परिवार को एक और मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा। परिवार का घर जब्त हो गया और माता-पिता का कारोबार बंद हो गया। उनके गोद लिए पिता की तबीयत भी बिगड़ने लगी, जबकि इसी दौरान आयशा की नौकरी चली गई। इसके बाद परिवार हेवर्ड चला गया। यहीं से आयशा ने स्थानीय स्तर पर सामाजिक मुद्दों को लेकर सक्रिय रूप से काम करना शुरू किया।
उन्होंने नगर परिषद की बैठकों में हिस्सा लिया और किफायती आवास जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। साल 2018 में उन्होंने हेवर्ड सिटी काउंसिल का चुनाव जीता।
राजनीति में लगातार बढ़ता गया कद
साल 2022 में आयशा कैलिफोर्निया की स्टेट लेजिस्लेचर के लिए चुनी गईं। इस उपलब्धि के साथ वह पहली अफगान-अमेरिकी और पहली मुस्लिम महिला बनीं, जिसने इस पद पर जगह बनाई। अपने राजनीतिक अभियान में उन्होंने किफायती स्वास्थ्य सेवाओं, अरबपतियों पर अधिक कर, छात्र ऋण माफी, सामाजिक कल्याण योजनाओं और कॉर्पोरेट प्रभाव को कम करने जैसी नीतियों पर जोर दिया।
सामाजिक मुद्दों पर भी सक्रिय रही हैं आयशा
राजनीति में आने से पहले और उसके बाद भी आयशा बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दों पर काम करती रही हैं। उन्होंने किफायती आवास, शिक्षा, नागरिक भागीदारी और आर्थिक असमानता जैसे विषयों को लेकर अभियान चलाए हैं।
वह अलामेडा काउंटी ह्यूमन रिलेशंस कमीशन की चेयर रह चुकी हैं। इसके अलावा अफगान कोएलिशन, एबोड सर्विसेज और ट्राई-सिटी वॉलंटियर्स जैसे गैर-लाभकारी संगठनों के बोर्ड में भी काम कर चुकी हैं। वह अलामेडा काउंटी पब्लिक हेल्थ कमिश्नर और बे एरिया विमेंस मार्च में स्पीकर की भूमिका भी निभा चुकी हैं।
आयशा को व्हाइट हाउस राउंडटेबल ऑफ अफगान-अमेरिकन लीडर्स में भी शामिल होने के लिए चुना गया था। अब अमेरिकी कांग्रेस में पहुंचकर उन्होंने अपने संघर्ष और राजनीतिक सफर को एक ऐतिहासिक उपलब्धि में बदल दिया है।



