एशिया में अल नीनो का खतरा बढ़ा: भीषण गर्मी, सूखा और बाढ़ की आशंका

दिल्ली। एशिया के कई देशों के लिए मौसम से जुड़ी चिंताएं बढ़ गई हैं। संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि वर्ष 2026 के अंत तक शक्तिशाली अल नीनो (El Nino) विकसित होने की लगभग 90 प्रतिशत संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस जलवायु घटना के प्रभाव से एशिया के कई हिस्सों में मौसम का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे करोड़ों लोगों के जीवन पर असर पड़ने की आशंका है।
विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो के कारण कई देशों में भीषण गर्मी, लंबे समय तक सूखे की स्थिति और कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा व बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं देखने को मिल सकती हैं। इससे कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिसके चलते खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी और खाद्य संकट की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
भारतीय मानसून पर पड़ सकता है असर
भारत के लिए भी यह चेतावनी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अल नीनो का प्रभाव भारतीय मानसून पर पड़ सकता है। यदि यह प्रभाव मजबूत रहता है तो देश के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है, जबकि कुछ क्षेत्रों में असामान्य बारिश की स्थिति बन सकती है। इससे किसानों और कृषि क्षेत्र को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
जलवायु विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तापमान में लगातार वृद्धि और जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम संबंधी घटनाएं अधिक तीव्र होती जा रही हैं। ऐसे में सरकारों और स्थानीय प्रशासन को पहले से तैयारी करने की जरूरत है ताकि संभावित आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
एशिया के लिए चुनौती
विशेषज्ञों ने लोगों से मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों पर नजर रखने और जल संरक्षण सहित पर्यावरण संरक्षण के उपाय अपनाने की अपील की है। अल नीनो का यह संभावित प्रभाव आने वाले महीनों में पूरे एशिया के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

