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ऑपरेशन सिंदूर की शौर्य गाथा: वीरांगनाओं ने कहा- बेटों को भी सेना में भेजेंगे, देश के लिए बलिदान पर गर्व

दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के दौरान देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों के परिवार आज भी अपने वीर सपूतों पर गर्व महसूस कर रहे हैं।

सरकार द्वारा उन्हें आधिकारिक रूप से बलिदानी का दर्जा दिए जाने के बाद उनके परिजनों का कहना है कि यह सम्मान पूरे देश का सम्मान है। कई वीरांगनाओं ने भावुक होकर कहा कि यदि उनके बेटे सेना में जाना चाहेंगे तो वे उन्हें पूरे गर्व के साथ देश सेवा के लिए भेजेंगी।

सूबेदार पवन कुमार हुए शहीद

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा निवासी सूबेदार मेजर पवन कुमार जरयाल 9 मई 2025 को पुंछ सेक्टर में पाकिस्तानी गोलाबारी (Operation Sindoor) का जवाब देते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे।

उनकी पत्नी सुषमा ने कहा, “हमने पहले ही तय कर लिया था कि अगर वे लौटे तो हमारे होंगे, नहीं लौटे तो देश के हो जाएंगे।” उन्होंने कहा कि पति का नाम राष्ट्रीय समर स्मारक पर दर्ज होना पूरे परिवार के लिए गर्व की बात है।

हरियाणा के दिनेश नायक हुए शहीद

हरियाणा के पलवल निवासी लांस नायक दिनेश कुमार शर्मा की पत्नी सीमा देवी ने भी अपने पति के बलिदान पर गर्व जताते हुए कहा कि वह अपने दोनों बेटों को भी सेना में भेजना चाहेंगी। दिनेश 7 मई 2025 को पुंछ सेक्टर में शहीद हुए थे।

बिहारी के सुनील कुमार हुए शहीद

बिहार के बक्सर निवासी हवलदार सुनील कुमार सिंह यादव ने राजौरी सेक्टर में पाकिस्तानी ड्रोन हमले के दौरान (Operation Sindoor) साथियों की जान बचाते हुए वीरता दिखाई। उनकी पत्नी सुजाता देवी ने कहा कि जरूरत पड़ी तो वह अपने दोनों बेटों को भी देश सेवा के लिए समर्पित कर देंगी।

राजस्थान के सुरेंद्र कुमार हुए शहीद

राजस्थान के झुंझुनूं निवासी सार्जेंट सुरेंद्र कुमार मोगा की पत्नी सीमा देवी ने कहा कि उन्हें किसी सहायता की अपेक्षा नहीं थी, बस उनके पति के बलिदान को सम्मान मिलना चाहिए था।

वहीं जम्मू के राइफलमैन सुनील कुमार के माता-पिता ने कहा कि बेटे को खोने का दुख हमेशा रहेगा, लेकिन राष्ट्र के लिए उसका बलिदान उनके लिए सबसे बड़ा गर्व है। इन परिवारों का साहस और देशभक्ति पूरे राष्ट्र के लिए प्रेरणा बन गई है।

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