पेरिस में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर फेंके मोलोटोव कॉकटेल, जानिए क्या है यह हथियार और कैसे पड़ा इसका नाम

पेरिस। फ्रांस की राजधानी पेरिस में प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क उठी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस और सुरक्षा बलों पर पत्थर, बोतलें और मोलोटोव कॉकटेल फेंके। इस दौरान एक पुलिसकर्मी आग की चपेट में आ गया। घटना के बाद फ्रांस में हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। ऐसे में मोलोटोव कॉकटेल एक बार फिर चर्चा में है। आइए जानते हैं कि यह क्या है और इसका नाम कैसे पड़ा।
दुनिया के अलग-अलग देशों में महंगाई, बेरोजगारी, सरकारी नीतियों और सामाजिक मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। फ्रांस में भी पिछले कुछ हफ्तों से महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर रहे हैं।
31 अक्टूबर को लगातार तीसरे सप्ताह फ्रांस में हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया। विरोध का मुख्य मुद्दा बढ़ती महंगाई, ईंधन की कीमतें और सार्वजनिक सेवाओं में कटौती था। Le Monde की रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में करीब 3.20 लाख लोगों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया। ज्यादातर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुईं। पेरिस में कुछ उपद्रवियों ने पुलिसकर्मियों पर मोलोटोव कॉकटेल से हमला किया।
क्या है मोलोटोव कॉकटेल?
मोलोटोव कॉकटेल एक तरह का आग लगाने वाला हथियार है, जिसे आमतौर पर पेट्रोल बम भी कहा जाता है। यह कांच की बोतल से बनाया जाने वाला एक अस्थायी आगजनी उपकरण है। इसका इस्तेमाल इतिहास में युद्ध, दंगों और हिंसक विरोध प्रदर्शनों के दौरान किया जाता रहा है।
इसे फेंकने से आग फैल सकती है और आसपास मौजूद लोगों, वाहनों तथा इमारतों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। यह हथियार बेहद खतरनाक होता है और इसके इस्तेमाल से जानलेवा चोटें लग सकती हैं।
कैसे पड़ा मोलोटोव कॉकटेल नाम?
इस हथियार का नाम सोवियत संघ के तत्कालीन विदेश मंत्री व्याचेस्लाव मोलोटोव के नाम पर पड़ा। 1939-40 के सोवियत-फिनलैंड युद्ध के दौरान फिनलैंड के लोगों ने सोवियत सेना के खिलाफ इस तरह के आग लगाने वाले हथियारों का इस्तेमाल किया था।
उस समय फिनलैंड के लोगों ने व्यंग्य के तौर पर इसे ‘मोलोटोव कॉकटेल’ नाम दिया था। इसके बाद यह नाम दुनिया भर में प्रचलित हो गया।
विरोध प्रदर्शनों में क्यों होता है इस्तेमाल?
मोलोटोव कॉकटेल का इस्तेमाल आमतौर पर उन परिस्थितियों में देखा गया है, जहां विरोध प्रदर्शन हिंसक हो जाते हैं और उपद्रवी पुलिस, सुरक्षा बलों या सरकारी संपत्तियों को निशाना बनाते हैं।
कम संसाधनों में तैयार किया जा सकने वाला यह आगजनी उपकरण बेहद खतरनाक होता है। इसके इस्तेमाल से आग तेजी से फैल सकती है और लोगों की जान के साथ-साथ सार्वजनिक और निजी संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंच सकता है।



