यूरोप में Gen Z का विरोध प्रदर्शन हिंसक, जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में दुकानों में लूटपाट और पुलिस पर हमला

महंगाई, महंगे किराये और सरकारी सेवाओं में कटौती के खिलाफ सड़कों पर उतरे युवा; जर्मनी में 27 पुलिसकर्मी घायल, सैकड़ों हिरासत में
यूरोप के कई देशों में बढ़ती महंगाई, महंगे किराये, शिक्षा व्यवस्था की बदहाल स्थिति और सरकारी सेवाओं में कटौती के खिलाफ युवाओं का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। फ्रांस के बाद अब जर्मनी में भी प्रदर्शन हिंसक हो गए। शनिवार देर रात जर्मनी के वित्तीय केंद्र फ्रैंकफर्ट में उपद्रवियों ने दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की। कई अन्य शहरों में भी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। पुलिस के मुताबिक, हिंसा में 27 पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया।
प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने उपद्रवियों को नियंत्रित करने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों ने इमरजेंसी सेवाओं के कर्मचारियों पर पटाखे, पत्थर और बोतलें फेंकीं। हालांकि, दिन में हजारों लोग शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर उतरे थे।
इन प्रदर्शनों का आयोजन ‘Gen Z रेगेल्ट’ नाम के अभियान समूह ने किया था, जिसका अर्थ है ‘Gen Z ने चार्ज लिया’। प्रदर्शनकारी स्कूलों में फंडिंग की कमी, बढ़ते जीवन-यापन के खर्च, सरकारी खर्च में कटौती और अनिवार्य सैन्य सेवा के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे।
फ्रांस में 3.20 लाख से ज्यादा लोगों ने किया प्रदर्शन
जर्मनी में हिंसा की घटनाएं फ्रांस में युवाओं के नेतृत्व में हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद सामने आई हैं। शनिवार को फ्रांस में 3.20 लाख से अधिक लोग सड़कों पर उतरे। उन्होंने बढ़ती महंगाई और सरकारी सेवाओं, खासकर शिक्षा व्यवस्था की स्थिति के खिलाफ आवाज उठाई।
प्रदर्शनों को देखते हुए फ्रांस में हजारों पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। कुछ शहरों में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े। फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, शनिवार के प्रदर्शनों के दौरान 770 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया।
इटली और पुर्तगाल में भी विरोध प्रदर्शन
यूरोप के अन्य देशों में भी विरोध की लहर देखने को मिली। इटली की राजधानी रोम और ट्यूरिन में पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। वहीं पुर्तगाल में पुलिस ने एक नए टेंट कैंप को हटाने की कार्रवाई की।
यह कैंप हजारों लोगों के किराये के बिल के विरोध में मार्च निकालने के बाद बनाया गया था। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि देश में आवास संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। पिछले दस वर्षों में पुर्तगाल में घरों की कीमतें दोगुनी से अधिक हो चुकी हैं।
फ्रांस, बेल्जियम, आयरलैंड, स्पेन, पुर्तगाल, इटली, ग्रीस, सर्बिया और अल्बानिया समेत कई यूरोपीय देशों में युवा प्रदर्शन कर रहे हैं। अलग-अलग देशों में मांगें अलग हैं, लेकिन महंगाई, किफायती आवास की कमी, शिक्षा की गुणवत्ता और सरकारी सेवाओं में कटौती जैसे मुद्दे प्रदर्शनों के केंद्र में हैं।
फ्रैंकफर्ट में दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट
शनिवार रात फ्रैंकफर्ट पुलिस ने शहर के बीचोंबीच हिंसक दंगे होने की जानकारी दी। हालात संभालने के लिए विशेष पुलिस इकाइयों को तैनात किया गया। शहर की प्रमुख शॉपिंग स्ट्रीट के बड़े हिस्से को भी बंद करना पड़ा।
पुलिस के अनुसार, कई दुकानों की खिड़कियां तोड़ी गईं और इमरजेंसी सेवाओं पर मोलोटोव कॉकटेल फेंके गए। एक गन शॉप की खिड़कियां भी तोड़ी गईं। इस मामले में एक संदिग्ध को गिरफ्तार कर उसके पास से दो हथियार जब्त किए गए। उपद्रवियों ने दूसरी दुकानों में भी तोड़फोड़ की और कई सामान चुरा लिए।
हेस्से राज्य के गृह मंत्री रोमन पोसेक ने बताया कि प्रदर्शन में करीब 100 ऐसे वामपंथी चरमपंथी भी शामिल हो गए थे, जिनकी पहचान की गई है। उन्होंने प्रदर्शन के हिंसा और लूटपाट में बदलने को शर्मनाक बताया।
जर्मनी के कई शहरों में पुलिस से झड़प
फ्रैंकफर्ट के अलावा कोलोन, बर्लिन और हैम्बर्ग में भी हिंसा की घटनाएं सामने आईं। कोलोन में मुख्य रेलवे स्टेशन के पास पुलिस अधिकारियों पर हमला किया गया और उन पर बोतलें फेंकी गईं।
बर्लिन पुलिस के मुताबिक, दिन में हुए बड़े प्रदर्शनों के बाद शाम को एक छोटे प्रदर्शन के दौरान 27 पुलिस अधिकारी घायल हुए। इस दौरान 56 लोगों को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया। हैम्बर्ग में काले कपड़े पहने लोगों ने पटाखे जलाए और बैरिकेड्स में आग लगा दी। पुलिस ने यहां 120 लोगों को गिरफ्तार किया।
फ्रैंकफर्ट, म्यूनिख और बर्लिन में अधिकारियों ने 18 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारियों के शामिल होने की जानकारी दी। जर्मन मीडिया के मुताबिक, शनिवार को देश के अलग-अलग शहरों में हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया।
‘शांति और आजादी के लिए हैं प्रदर्शन’
‘Gen Z रेगेल्ट’ की प्रवक्ता लीना फ्रेडरिक ने कहा कि ये प्रदर्शन शांति और आजादी के लिए हैं, न कि युद्ध और जबरदस्ती के लिए। उन्होंने स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर समर्थन देने की जरूरत पर जोर दिया। संगठन अनिवार्य सैन्य सेवा का विरोध करता है और चाहता है कि जिम्मेदारियों का बंटवारा निष्पक्ष तरीके से हो।
वहीं जर्मनी के गृह मंत्री अलेक्जेंडर डोब्रिंड्ट ने ‘बिल्ड’ अखबार से कहा कि पुलिस ने रात में उस तरह की हिंसा को रोक दिया, जैसी हाल के हफ्तों में पेरिस में देखी गई थी। उन्होंने दंगाइयों और लुटेरों के खिलाफ कड़ी सजा की मांग की।
पुलिस के मुताबिक, रविवार रात तक फ्रैंकफर्ट में हालात शांत हो गए थे। हालांकि, यूरोप के कई देशों में जारी युवा प्रदर्शनों ने महंगाई, आवास संकट और सरकारी सेवाओं को लेकर बढ़ते असंतोष को फिर से सामने ला दिया है।



