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इजराइल में सरकार गठन की कवायद तेज, गादी आइजनकोट को समर्थन देने को तैयार 2 अरब पार्टियां; स्पीकर को हटाने की रखी शर्त

इजराइल में चुनाव के बाद सरकार गठन को लेकर जारी राजनीतिक खींचतान के बीच नया घटनाक्रम सामने आया है। देश की दो अरब पार्टियों ने गादी आइजनकोट को बाहर से समर्थन देने की पेशकश की है। हालांकि, इसके लिए उन्होंने एक शर्त रखी है कि सरकार गठन से पहले नेसेट (इजराइली संसद) के स्पीकर अमीर ओहाना को पद से हटाया जाए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर आइजनकोट इस शर्त पर सहमत होते हैं तो सरकार बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। दोनों अरब पार्टियों का प्रमुख उद्देश्य बेंजामिन नेतन्याहू को प्रधानमंत्री पद से हटाना है। इसी रणनीति को लेकर दोनों दलों के नेताओं ने सोमवार, 2 नवंबर को बैठक की।

स्पीकर अमीर ओहाना को हटाने की पहली मांग

अरब पार्टी जॉइंट लिस्ट ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि उसने सरकार गठन की कवायद शुरू कर दी है। पार्टी की मांग है कि चेंज ब्लॉक के नेता सबसे पहले नेसेट के स्पीकर को पद से हटाएं। इसे सरकार बनाने की दिशा में पहला कदम बताया गया है।

वहीं, अरब गठबंधन RA’AM के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि उनकी पार्टी बाहर से समर्थन देने के लिए तैयार है। उन्होंने संकेत दिया कि इस संबंध में जल्द ही पार्टी के नेता राष्ट्रपति से मुलाकात कर सकते हैं।

19 सांसदों के समर्थन से बहुमत का दावा

दोनों अरब पार्टियों के पास कुल 19 सांसद हैं। यदि ये सभी गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाले गठबंधन को समर्थन देते हैं, तो उसके सांसदों की संख्या 67 तक पहुंच सकती है। इजराइल में सरकार बनाने के लिए संसद में कम से कम 61 सदस्यों का समर्थन जरूरी होता है।

फिलहाल बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन के पास 53 सांसद बताए जा रहे हैं। ऐसे में अरब पार्टियों का समर्थन सरकार गठन की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा सकता है।

बुधवार से राष्ट्रपति हर्जोग करेंगे पार्टियों से बातचीत

‘टाइम्स ऑफ इजराइल’ के मुताबिक, राष्ट्रपति इसाक हर्जोग बुधवार से एक-एक कर सभी राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे। इसके बाद वह किसी एक नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं।

हर्जोग ने कहा है कि देश को एक और चुनाव से बचाने की जरूरत है। उनकी पहली कोशिश बहुमत के आधार पर सरकार बनाने के लिए नेता चुनने की होगी। यदि कोई भी नेता बहुमत साबित नहीं कर पाता है, तो अंततः संसद भंग की जा सकती है। ऐसी स्थिति में अगले चुनाव तक बेंजामिन नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं।

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