तांबे की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाया चोरी का कारोबार, भारत समेत दुनिया के कई देशों में मेट्रो, रेलवे और टेलीकॉम नेटवर्क निशाने पर

नई दिल्ली। तांबे (कॉपर) की रिकॉर्ड कीमतों ने दुनिया भर में चोरी के नए संगठित कारोबार को जन्म दे दिया है। भारत सहित चिली, कनाडा, ब्रिटेन, ब्राजील और स्पेन जैसे देशों में कॉपर केबल चोरी की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसका असर केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि रेलवे, मेट्रो, बिजली और टेलीकॉम जैसी जरूरी सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
भारत में लगातार बढ़ रहे मामले
भारत में हाल के महीनों में दिल्ली मेट्रो, रेलवे, बीएसएनएल और बिजली नेटवर्क से कॉपर केबल चोरी के कई मामले सामने आए हैं।
दिल्ली के पंजाबी बाग में मेट्रो लाइन से 32 मीटर कॉपर केबल चोरी होने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया। वहीं बिहार के दानापुर रेल मंडल, जहानाबाद और मोकामा में सिग्नल व बिजली के तार चोरी होने से ट्रेन संचालन घंटों प्रभावित रहा। झारखंड के धनबाद में रेलवे सुरक्षा बल ने केबल चोरी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया।
टेलीकॉम क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है। जयपुर में बीएसएनएल की करीब 1.5 करोड़ रुपये की भूमिगत केबल चोरी के मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि नाशिक और रायबरेली में भी करोड़ों रुपये के बिजली और कॉपर केबल बरामद किए गए।
दुनिया भर में बढ़ा संकट
कॉपर चोरी अब वैश्विक समस्या बन चुकी है। दुनिया के सबसे बड़े तांबा उत्पादक देश चिली में पिछले पांच वर्षों में करीब एक अरब डॉलर के चोरी किए गए तांबे का नेटवर्क सामने आया है। वर्ष 2025 में वहां 420 किलोमीटर कॉपर केबल चोरी होने से करीब 2.6 लाख उपभोक्ता प्रभावित हुए।
कनाडा में 2022 के बाद कॉपर चोरी के मामलों में 700 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। ब्रिटेन में सोलर और विंड फार्म से कॉपर चोरी 140 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ी है, जबकि स्पेन में पिछले साल 65 हजार मीटर से अधिक कॉपर केबल चोरी हुई।
आखिर क्यों बढ़ रही है कॉपर चोरी?
विशेषज्ञों के अनुसार, तांबे की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज उछाल इसकी सबसे बड़ी वजह है। पिछले वर्ष उत्पादन संबंधी समस्याओं के कारण कॉपर की कीमतें 40 प्रतिशत से अधिक बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं। वहीं इलेक्ट्रिक वाहन, एआई डेटा सेंटर, बिजली ग्रिड और निर्माण क्षेत्र में बढ़ती मांग के कारण इसकी कीमतें अब भी ऊंची बनी हुई हैं।
इसी वजह से संगठित गिरोह रेलवे सिग्नलिंग, बिजली लाइन, टेलीकॉम नेटवर्क, ईवी चार्जिंग स्टेशन और सोलर-विंड परियोजनाओं को निशाना बना रहे हैं।
सिर्फ तार नहीं, जरूरी सेवाएं भी हो रही प्रभावित
कॉपर चोरी से केवल तार की कीमत का नुकसान नहीं होता, बल्कि बिजली, इंटरनेट, फोन और रेल सेवाएं भी ठप हो जाती हैं। ब्रिटेन में पिछले वित्त वर्ष के दौरान केबल चोरी की 111 घटनाओं के कारण ट्रेनों को करीब 1.28 लाख मिनट की देरी हुई और रेलवे को लाखों पाउंड का नुकसान उठाना पड़ा।
सरकारें कैसे कर रही हैं कार्रवाई?
कॉपर चोरी रोकने के लिए कई देशों ने सख्त कदम उठाए हैं। ब्रिटेन ने स्क्रैप डीलरों के लिए नकद भुगतान पर रोक और लाइसेंस व्यवस्था लागू की है। ब्राजील ने केबल चोरी पर कड़ी सजा का कानून बनाया है, जबकि चिली इंटरपोल के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चोरी के तांबे के नेटवर्क पर कार्रवाई कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में भी कॉपर चोरी अब सामान्य अपराध नहीं रह गई है। यदि तांबे की कीमतें ऊंची बनी रहीं और निगरानी व्यवस्था मजबूत नहीं की गई, तो आने वाले समय में मेट्रो, रेलवे, बिजली और टेलीकॉम जैसी आवश्यक सेवाओं पर इसका असर और बढ़ सकता है।

