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Chhattisgarh

बलौदाबाजार में 200 बेड के ESIC अस्पताल की तैयारी, हजारों श्रमिकों को मिलेगी बड़ी राहत

बलौदाबाजार: छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले हजारों श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। जिले में 200 बेड के सर्व सुविधायुक्त ESIC अस्पताल की स्थापना को लेकर पहल तेज हुई है। इस संबंध में राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने नई दिल्ली में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया से मुलाकात कर अस्पताल की स्थापना का प्रस्ताव रखा।

बलौदाबाजार जिला सीमेंट, पावर और स्टील उद्योगों के लिए जाना जाता है। इसके अलावा जिले में बड़ी संख्या में लघु और मध्यम उद्योग भी संचालित हैं। इन औद्योगिक इकाइयों में बड़ी संख्या में श्रमिक काम करते हैं। ऐसे में श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना लंबे समय से एक बड़ी जरूरत रही है।

बलौदाबाजार में 200 बेड का ESIC अस्पताल, दिल्ली में हुई बड़ी चर्चा

राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के सामने बलौदाबाजार में 200 बिस्तरों वाले ESIC अस्पताल की स्थापना का प्रस्ताव रखा। मुलाकात के दौरान उन्होंने जिले की औद्योगिक स्थिति और यहां काम करने वाले श्रमिकों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

बताया गया कि बलौदाबाजार के औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को गंभीर बीमारी, दुर्घटना या किसी आपात स्थिति में कई बार बेहतर इलाज के लिए दूसरे बड़े जिलों या शहरों का रुख करना पड़ता है। खासकर औद्योगिक हादसों के मामलों में समय पर इलाज मिलना बेहद जरूरी होता है।

ऐसे में अगर जिले में ही आधुनिक सुविधाओं से लैस 200 बेड का ESIC अस्पताल स्थापित होता है, तो श्रमिकों को बड़ी राहत मिल सकती है।

केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने इस जनहित से जुड़े प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, अस्पताल की स्थापना के लिए अंतिम मंजूरी और आगे की प्रक्रिया अभी बाकी है।

17,942 पंजीकृत कर्मचारी, 18,308 बीमित लोगों को मिलेगा लाभ

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बलौदाबाजार जिले में वर्तमान में 17,942 कर्मचारी ESIC में पंजीकृत हैं। वहीं 18,308 बीमित व्यक्ति ESIC की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का लाभ ले रहे हैं।

इन आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले में ESIC से जुड़ी स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत कितनी बड़ी है। अगर 200 बेड का अस्पताल स्थापित होता है तो इससे पात्र श्रमिकों के साथ उनके परिवारों को भी स्थानीय स्तर पर इलाज की बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है।

ESIC यानी कर्मचारी राज्य बीमा योजना के तहत पात्र श्रमिकों को सिर्फ इलाज की सुविधा ही नहीं मिलती, बल्कि बीमारी, मातृत्व और कार्यस्थल पर दुर्घटना जैसी परिस्थितियों में सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा भी दी जाती है।

हादसा हो या गंभीर बीमारी, इलाज के लिए नहीं जाना पड़ेगा दूर

बलौदाबाजार में सीमेंट, पावर और स्टील से जुड़े उद्योगों की संख्या अधिक है। इन उद्योगों में काम करने वाले श्रमिकों के सामने कार्यस्थल पर दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है। किसी बड़े हादसे की स्थिति में मरीज को तत्काल बेहतर चिकित्सा सुविधा की जरूरत होती है।

फिलहाल कई मामलों में गंभीर मरीजों को दूसरे बड़े अस्पतालों या शहरों में रेफर करना पड़ता है। इसमें समय भी लगता है और परिवार पर आर्थिक बोझ भी बढ़ता है।

अगर 200 बेड का ESIC अस्पताल शुरू होता है तो गंभीर बीमारी, औद्योगिक दुर्घटना और आपातकालीन परिस्थितियों में स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जा सकेगा। इससे मरीजों को दूसरे शहरों तक ले जाने की जरूरत कम हो सकती है।

श्रमिकों के परिवारों को भी मिलेगा फायदा

ESIC व्यवस्था का लाभ केवल पंजीकृत कर्मचारी तक सीमित नहीं रहता। पात्र बीमित व्यक्तियों के परिवार भी इसके तहत उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं। यही वजह है कि बलौदाबाजार में अस्पताल बनने की स्थिति में इसका फायदा बड़ी संख्या में परिवारों तक पहुंचने की उम्मीद है।

औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास रहने वाले श्रमिक परिवारों के लिए नजदीक ही अस्पताल उपलब्ध होना काफी महत्वपूर्ण होगा। सामान्य बीमारी से लेकर गंभीर स्वास्थ्य समस्या तक, उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी।

छत्तीसगढ़ में भी मजबूत हो रहा ESIC नेटवर्क

प्रदेश में भी ESIC का दायरा लगातार बढ़ रहा है। 31 मार्च 2025 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 15,66,430 कर्मचारी ESIC में पंजीकृत हैं। इनमें 6,27,260 बीमित पुरुष और 79,237 बीमित महिलाएं शामिल हैं।

वहीं प्रदेश में ESIC के तहत कुल 37,283 नियोजक पंजीकृत हैं, जिनमें से 13,426 सक्रिय रूप से योगदान कर रहे हैं।

इन आंकड़ों से साफ है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में कर्मचारी ESIC की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े हुए हैं। ऐसे में औद्योगिक जिलों में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार श्रमिकों के लिए काफी अहम माना जा रहा है।

अस्पताल बनने से क्या बदलेगा?

बलौदाबाजार में प्रस्तावित 200 बेड के ESIC अस्पताल की स्थापना होने पर जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को कई स्तर पर फायदा मिल सकता है।

  • गंभीर बीमारी का इलाज स्थानीय स्तर पर मिल सकेगा।
  • औद्योगिक दुर्घटनाओं में तत्काल चिकित्सा सुविधा मिलने की उम्मीद होगी।
  • मरीजों को दूसरे शहरों में रेफर करने की जरूरत कम हो सकती है।
  • श्रमिकों के परिवारों को भी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
  • इलाज के लिए आने-जाने का खर्च और समय दोनों बच सकते हैं।
  • जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं का बुनियादी ढांचा मजबूत होगा।

हालांकि, फिलहाल यह ध्यान रखना जरूरी है कि अस्पताल की स्थापना का प्रस्ताव रखा गया है और अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया अभी बाकी है। केंद्रीय स्तर से मंजूरी मिलने और आगे की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अस्पताल के निर्माण और संचालन की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा।

श्रमिकों के लिए बड़ी उम्मीद

बलौदाबाजार में 200 बेड का ESIC अस्पताल सिर्फ एक अस्पताल नहीं, बल्कि जिले के हजारों श्रमिक परिवारों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा की उम्मीद है। औद्योगिक गतिविधियों वाले इस जिले में अगर यह अस्पताल स्थापित होता है तो श्रमिकों को इलाज के लिए दूसरे शहरों पर निर्भरता कम होगी।

अब सबकी नजर केंद्र सरकार के अगले कदम पर है। राजस्व मंत्री की केंद्रीय मंत्री से हुई चर्चा के बाद अस्पताल के प्रस्ताव को लेकर उम्मीद जरूर बढ़ी है। अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है और अस्पताल का काम आगे बढ़ता है, तो आने वाले समय में बलौदाबाजार के श्रमिकों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में बड़ी राहत मिल सकती है।

 

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Shruti Jangde

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