BRICS घोषणा पत्र में आतंकवाद पर भारत को समर्थन, टैरिफ और UNSC सुधार पर बनी अहम सहमति

आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख
नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से घोषणा पत्र को मंजूरी दी। इसमें पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करते हुए आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर जोर दिया गया। सीमापार आतंकवाद और आतंकियों की फंडिंग का मुद्दा भी घोषणा पत्र में शामिल किया गया। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र की आतंकरोधी नीति को जल्द तैयार करने की मांग की गई।
भारत के लिए यह बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है। घोषणा पत्र में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का समर्थन किया गया है। इससे सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की मांग को मजबूती मिल सकती है।
चीन और रूस को भी मिला समर्थन
घोषणा पत्र में एकतरफा व्यापार नीतियों और टैरिफ के खिलाफ साझा चिंता जताई गई। BRICS देशों ने कहा कि एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपाय वैश्विक व्यापार को प्रभावित करते हैं और बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के नियमों के अनुरूप नहीं हैं। इससे चीन को अमेरिकी व्यापार नीतियों के खिलाफ समूह का समर्थन मिला।
रूस को भी एकतरफा प्रतिबंधों के खिलाफ BRICS के रुख से फायदा हुआ। घोषणा पत्र में अंतरराष्ट्रीय विवादों को बातचीत, सलाह और कूटनीतिक माध्यमों से सुलझाने पर जोर दिया गया। भारत और चीन के बीच भी संबंधों को बेहतर बनाने तथा सीमा से जुड़े मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने पर सहमति दिखाई दी।
पश्चिम एशिया के मुद्दों पर भी साझा रुख
ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की मौजूदगी ने BRICS के दायरे को और महत्वपूर्ण बनाया है। इजराइल और गाजा के मुद्दे पर समूह ने अपना रुख स्पष्ट किया। साथ ही एकतरफा नीतियों के विरोध में सामूहिक रुख अपनाया गया।
कुल मिलाकर घोषणा पत्र में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई, वैश्विक संस्थाओं में सुधार, व्यापारिक प्रतिबंधों का विरोध और अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान जैसे मुद्दों पर सहमति बनी। इससे BRICS की एक स्वतंत्र और प्रभावशाली वैश्विक मंच के रूप में भूमिका मजबूत होने का संकेत मिला है।



