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हिंद महासागर में बढ़ रही चीन की नौसैनिक ताकत, भारत के लिए बढ़ी चुनौती; IAC-2 और पनडुब्बियों से जवाब की तैयारी

हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की नौसैनिक मौजूदगी लगातार बढ़ रही है। जिबूती से लेकर पाकिस्तान के ग्वादर तक चीन अपनी समुद्री पहुंच और बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है। जिबूती में चीन का विदेशी सैन्य अड्डा है, जबकि हिंद महासागर में उसके युद्धपोतों और शोध जहाजों की मौजूदगी भी लगातार देखी जा रही है।

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जिबूती से ग्वादर तक चीन की मौजूदगी

चीन ने 2017 में जिबूती में अपना पहला विदेशी सैन्य अड्डा शुरू किया था। इसके अलावा पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह समेत हिंद महासागर क्षेत्र के कई अहम स्थानों पर चीन की आर्थिक और समुद्री गतिविधियां हैं। इससे चीन को अपने युद्धपोतों और अन्य जहाजों के लिए लंबी दूरी के अभियानों में मदद मिल सकती है।

चीन की नौसेना का विस्तार भी तेजी से हो रहा है। उसके पास तीन सक्रिय एयरक्राफ्ट कैरियर हैं और चौथे एयरक्राफ्ट कैरियर पर भी काम चल रहा है। अमेरिकी आकलनों में 2035 तक चीन के पास नौ एयरक्राफ्ट कैरियर होने की संभावना जताई गई है।

भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?

चीन की बढ़ती समुद्री क्षमता भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हिंद महासागर भारत की रणनीतिक सुरक्षा और व्यापार के लिहाज से बेहद अहम है। अगर चीन इस क्षेत्र में लंबे समय तक अपने युद्धपोतों और सैन्य सुविधाओं की मौजूदगी बनाए रखता है, तो इससे भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति पर दबाव बढ़ सकता है।

हालांकि, सिर्फ जहाजों की संख्या ही नौसैनिक ताकत तय नहीं करती। लंबे समय तक दूर समुद्र में अभियान चलाने का अनुभव, लॉजिस्टिक्स, निगरानी और पनडुब्बी रोधी क्षमताएं भी महत्वपूर्ण हैं।

IAC-2 और पनडुब्बियों से भारत की तैयारी

चीन की बढ़ती ताकत के बीच भारत अपनी नौसैनिक क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। रक्षा मंत्रालय के सामने दूसरे स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर IAC-2 का प्रस्ताव है। भारत अपनी पनडुब्बी क्षमता बढ़ाने के साथ डिस्ट्रॉयर, फ्रिगेट और समुद्री निगरानी प्रणालियों को भी मजबूत कर रहा है।

भारत की रणनीति सिर्फ चीन के बराबर युद्धपोत बनाने की नहीं, बल्कि ऐसी सी कंट्रोल और सी डिनायल क्षमता विकसित करने की है, जिससे जरूरत पड़ने पर हिंद महासागर में चीनी नौसेना की गतिविधियों को चुनौती दी जा सके।

आने वाले वर्षों में बढ़ेगी समुद्री होड़

मध्य-2030 के दशक तक चीन की एयरक्राफ्ट कैरियर क्षमता में और विस्तार की संभावना है। ऐसे में हिंद महासागर में भारत और चीन के बीच समुद्री प्रतिस्पर्धा लंबे समय तक चलने वाली रणनीतिक चुनौती बन सकती है।

अब मुकाबला केवल इस बात का नहीं है कि किस देश के पास कितने युद्धपोत हैं। असली सवाल यह है कि **हिंद महासागर में कौन लंबे समय तक अपनी नौसैनिक ताकत, निगरानी और रणनीतिक पहुंच बनाए रखने में सक्षम होगा।

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