तालिबान के 5 साल: जंग का शोर कम हुआ, लेकिन गरीबी और भुखमरी ने बढ़ाई मुश्किलें; महिलाओं पर पाबंदियां भी जारी

15 अगस्त 2021 को तालिबान के काबुल पर कब्जे के पांच साल पूरे हो गए हैं। इस दौरान अफगानिस्तान में पहले की तुलना में बड़े पैमाने पर जंग और हिंसा कम हुई है, लेकिन आम लोगों की मुश्किलें खत्म नहीं हुईं। देश अब भी गंभीर आर्थिक और मानवीय संकट से जूझ रहा है। करीब 2.19 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत है।
महिलाओं और लड़कियों पर सबसे ज्यादा असर
तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए। लड़कियों को छठी कक्षा के बाद पढ़ाई से रोक दिया गया है और महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा के दरवाजे बंद हैं। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक करीब 24 लाख लड़कियां माध्यमिक शिक्षा से बाहर हैं।
यह भी पढ़ें – इटली में मेलोनी को युवाओं से झटका,
यूएन वुमन के अनुसार, तालिबान ने महिलाओं के अधिकारों को सीमित करने वाले 100 से ज्यादा फरमान जारी किए हैं। 3,200 से ज्यादा महिलाओं के सर्वे में आधे से अधिक ने बताया कि वे अब महीने में केवल एक या दो बार घर से बाहर निकलती हैं।
आर्थिक संकट और बेरोजगारी की मार
अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था में कुछ सुधार के संकेत जरूर हैं, लेकिन इसका फायदा आम लोगों की आय और जीवन स्तर में पर्याप्त रूप से नहीं दिख रहा। बेरोजगारी, गरीबी और महंगाई लोगों की परेशानियां बढ़ा रही हैं। वहीं, विदेशी सहायता में कमी ने स्वास्थ्य और सामाजिक सेवाओं पर दबाव और बढ़ा दिया है।
स्वास्थ्य और खाद्य संकट भी गंभीर
मानवीय सहायता में कमी के बीच स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। CARE के मुताबिक 2026 की शुरुआत से करीब 150 स्वास्थ्य केंद्रों ने सेवाएं बंद या सीमित की हैं। संयुक्त राष्ट्र की 1.7 अरब डॉलर की मानवीय अपील को भी अब तक केवल करीब 25 फीसदी फंडिंग मिली है।
पांच साल बाद अफगानिस्तान की तस्वीर
तालिबान के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि सत्ता पर पकड़ बनाए रखना और देश में बड़े पैमाने की लड़ाई को कम करना है। लेकिन दूसरी तरफ गरीबी, बेरोजगारी, खाद्य संकट और महिलाओं के अधिकारों पर पाबंदियां आज भी गंभीर चुनौती बनी हुई हैं। संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि वास्तविक स्थिरता के लिए महिलाओं और लड़कियों के अधिकार बहाल करना जरूरी है।



