National

चंपत राय पर नया आरोप, राम निवास मंदिर की संपत्ति के गबन और अवैध कब्जे की एसआईटी से शिकायत

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। अयोध्या निवासी हरिशंकर सफरीवाला ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) को शिकायत देकर चंपत राय और उनके सहयोगियों पर श्री राम निवास मंदिर की संपत्ति के कथित गबन, अवैध कब्जे और आर्थिक अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं।

मंदिर की संपत्ति बेचने का आरोप

शिकायतकर्ता का आरोप है कि चंपत राय को यह जानकारी होने के बावजूद कि मंदिर की जमीन देवोत्तर संपत्ति है और उसका क्रय-विक्रय नहीं किया जा सकता, उन्होंने अन्य लोगों के साथ मिलकर करीब 5.80 करोड़ रुपये में संपत्ति का सौदा किया। शिकायत के मुताबिक, इस सौदे के लिए 70 लाख रुपये अग्रिम राशि ली गई, लेकिन यह रकम मंदिर के खाते में जमा नहीं कराई गई।

मंदिर पर कब्जा करने का भी आरोप

शिकायत में कहा गया है कि मंदिर परिसर में प्रबंधन समिति के सदस्यों का प्रवेश रोक दिया गया और मंदिर कार्यालय पर कब्जा कर लिया गया। साथ ही मंदिर की आलमारी, फर्नीचर, अन्य सामान, देवी-देवताओं की मूर्तियां, आभूषण और सोने-चांदी के धार्मिक सामान अपने कब्जे में लेने का भी आरोप लगाया गया है।

आभूषणों का हिसाब मांगा

हरिशंकर सफरीवाला का दावा है कि मंदिर के देवी-देवताओं के आभूषणों का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पहले भी नोटिस भेजा गया था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

किरायेदारों से अवैध वसूली का आरोप

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि मंदिर की दुकानों और भवनों को खाली कराने के नाम पर चेक या ड्राफ्ट के अलावा नकद राशि भी ली गई, जिसका कोई लेखा-जोखा नहीं है।

एसआईटी से की गई प्रमुख मांगें

शिकायतकर्ता ने एसआईटी से मांग की है कि:

  • राम निवास मंदिर का कब्जा मूल प्रबंधन समिति को वापस दिलाया जाए।
  • मंदिर की मूर्तियां और आभूषण सुरक्षित वापस कर उनकी जांच कराई जाए।
  • कथित रूप से ली गई 70 लाख रुपये की राशि ट्रस्ट में जमा कराई जाए।
  • पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।
  • मंदिर प्रबंधन समिति को हुए नुकसान की भरपाई के लिए कम से कम 5 करोड़ रुपये का मुआवजा दिलाया जाए।

फिलहाल, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच की मांग एसआईटी के समक्ष लंबित है।

Follow Us on Our Social Media

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button