ईरान युद्ध से अमेरिका के आधुनिक मिसाइल भंडार पर दबाव, स्टॉक भरने में लग सकते हैं तीन साल

वॉशिंगटन: ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच अमेरिका के आधुनिक हथियारों के भंडार को लेकर चिंता बढ़ गई है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, लंबे समय से चल रहे सैन्य अभियान के कारण अमेरिका की कई महत्वपूर्ण लंबी दूरी की मिसाइलों के स्टॉक पर दबाव बढ़ा है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि उसके पास अभी भी पर्याप्त हथियार मौजूद हैं और उत्पादन भी बढ़ाया जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ATACMS (आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम) और PrSM (प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल) जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ है। सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि इन मिसाइलों का उपलब्ध स्टॉक काफी हद तक उपयोग में आ चुका है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
किन हथियारों पर बढ़ा दबाव?
अमेरिकी थिंक टैंक CSIS के सार्वजनिक आंकड़ों पर आधारित विश्लेषण के अनुसार:
पैट्रियट एयर डिफेंस इंटरसेप्टर के भंडार का लगभग 65 प्रतिशत इस्तेमाल हो चुका है।
THAAD इंटरसेप्टर का स्टॉक करीब 38 प्रतिशत घटा है।
टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों के वैश्विक भंडार का लगभग आधा हिस्सा खर्च हो चुका है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ATACMS और PrSM अमेरिका की सबसे महत्वपूर्ण जमीन से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलों में शामिल हैं। इनका उपयोग सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्यों पर सटीक हमला करने के लिए किया जाता है।
भविष्य की चुनौतियां
रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि भविष्य में चीन, रूस या उत्तर कोरिया के साथ कोई बड़ा सैन्य संकट पैदा होता है, तो अमेरिका के लिए आधुनिक हथियारों की उपलब्धता चुनौती बन सकती है। इसी कारण अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अन्य सैन्य कमांड से भी मिसाइल भंडार मंगाने की प्रक्रिया शुरू की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा उत्पादन क्षमता के हिसाब से पैट्रियट, THAAD और टॉमहॉक जैसी मिसाइलों का स्टॉक दोबारा भरने में तीन साल या उससे अधिक समय लग सकता है।
अमेरिका का क्या कहना है?
व्हाइट हाउस ने इन रिपोर्टों पर पूरी तरह सहमति नहीं जताई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका के पास दुनिया के किसी भी देश की तुलना में अधिक हथियार और गोला-बारूद मौजूद है। वहीं पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता शॉन पार्नेल का कहना है कि अमेरिकी सेना के पास किसी भी संभावित अभियान के लिए पर्याप्त क्षमता और हथियार उपलब्ध हैं।
हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि उत्पादन बढ़ने के बावजूद यदि लंबे समय तक बड़े स्तर का युद्ध चलता है, तो मौजूदा उत्पादन क्षमता पर्याप्त साबित नहीं हो सकती।

