झीरम घाटी नक्सली हमला केस अंतिम दौर में, अभियोजन की बहस पूरी; आज बचाव पक्ष रखेगा दलील

जगदलपुर। झीरम घाटी नक्सली हमले से जुड़े मामले की सुनवाई अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। जगदलपुर जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर स्थित एनआईए की विशेष अदालत में सोमवार को मामले की अंतिम बहस शुरू हुई। अदालत ने पूरे दिन अभियोजन पक्ष की अंतिम दलीलें सुनीं, लेकिन न्यायालयीन समय समाप्त होने के कारण बहस पूरी नहीं हो सकी।
अब मंगलवार को मामले की सुनवाई दोबारा होगी, जिसमें बचाव पक्ष को अपनी अंतिम दलीलें रखने का मौका मिलेगा। दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय करेगी।
पूरे दिन चली अभियोजन पक्ष की बहस
सोमवार को अंतिम बहस शुरू होने के साथ ही जिला न्यायालय परिसर में गहमागहमी रही। एनआईए की विशेष अदालत में शासन की ओर से अभियोजन पक्ष ने मामले से जुड़े साक्ष्यों और तर्कों के आधार पर अपनी अंतिम दलीलें पेश कीं।
पूरे दिन अभियोजन पक्ष की दलीलें सुनी गईं। न्यायालयीन समय समाप्त होने के बाद सुनवाई आगे के लिए टाल दी गई।
अब बचाव पक्ष अपनी अंतिम दलीलें अदालत के सामने रखेगा। इसके बाद अदालत फैसला सुरक्षित रख सकती है या निर्णय सुनाने के लिए अगली तारीख तय कर सकती है।
25 मई 2013 को हुआ था झीरम घाटी हमला
झीरम घाटी हमला 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान हुआ था। दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में हुए इस नक्सली हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत कई लोगों की मौत हुई थी।
हमले में सुरक्षाकर्मियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं समेत बड़ी संख्या में लोग मारे गए थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इसके बाद से मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया लंबे समय से जारी है।
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11 आरोपियों के खिलाफ चल रहा अभियोजन
मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन चल रहा है। इनमें से एक आरोपी की मौत हो चुकी है, जबकि अन्य आरोपियों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अब तक 101 गवाहों के बयान अदालत में दर्ज कराए जा चुके हैं। गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामला अब अंतिम बहस के चरण में पहुंच गया है।
शासन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश पाणिग्रही मामले में पैरवी कर रहे हैं।

शहीदों के परिजनों की नजर अदालत की अगली कार्रवाई पर
झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े राजनीतिक और नक्सली हमलों में शामिल रहा है। मामले की सुनवाई अंतिम चरण में पहुंचने के बाद अब शहीदों के परिजनों के साथ राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों की नजर अदालत की अगली कार्रवाई पर है।
अभियोजन पक्ष की अंतिम दलीलों के बाद अब बचाव पक्ष का पक्ष सामने आना बाकी है। मंगलवार की सुनवाई के बाद यह स्पष्ट होगा कि अदालत मामले को किस दिशा में आगे बढ़ाती है।



