मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, 30 करोड़ के धान घोटाले की तर्ज पर पूरे प्रदेश में जांच के निर्देश

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर में सामने आए 30 करोड़ रुपये से अधिक के कथित धान घोटाले को गंभीरता से लेते हुए प्रदेशभर में जांच के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने सभी जिलों के कलेक्टरों को धान परिवहन और मिलिंग से जुड़े मामलों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) से जांच रिपोर्ट भी तलब की गई है।
मामले में कोर्ट ने तत्कालीन जबलपुर कलेक्टर की कार्रवाई के बाद सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन की ओर से की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी पेश करने के निर्देश दिए हैं।
यह भी पढ़ें – इंदौर में दिव्यांगजनों ने निकाली भव्य तिरंगा यात्रा
30 करोड़ से ज्यादा के फर्जीवाड़े का आरोप
जबलपुर में धान मिलिंग के नाम पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई थी। तत्कालीन कलेक्टर दीपक सक्सेना की जांच में 16 करोड़ रुपये से अधिक की धान की कथित फर्जी खरीदी का मामला सामने आया। धान के परिवहन के लिए इस्तेमाल वाहनों के रिकॉर्ड की जांच में भी कई गंभीर अनियमितताएं मिलीं।
जांच में पाया गया कि धान परिवहन करने वाले वाहनों को कटनी, नागपुर, उज्जैन, ग्वालियर, मुरैना और मंडला जैसे शहरों की ओर भेजे जाने का रिकॉर्ड दर्ज था। इन मार्गों पर चार प्रमुख टोल नाके पड़ते हैं।
इनमें मोहरा टोल कटनी मार्ग, बहोरीपार टोल नागपुर मार्ग, सालीवाड़ा टोल नाका मंडला मार्ग और शहपुरा टोल नरसिंहपुर, भोपाल और उज्जैन मार्ग पर स्थित है।
586 में सिर्फ 15 वाहन ही टोल से गुजरे
जांच के दौरान सामने आया कि धान परिवहन के लिए दर्ज किए गए 586 वाहनों में से केवल 15 वाहन ही संबंधित टोल नाकों से गुजरते हुए पाए गए। वहीं 576 वाहनों के टोल नाकों से गुजरने का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।
इस तरह करीब 97.4 प्रतिशत ट्रिप का टोल नाकों से गुजरने का रिकॉर्ड नहीं मिला, जिससे धान परिवहन के दावों पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
ट्रक की जगह कार और पिकअप के नंबर
जांच में यह भी सामने आया कि धान परिवहन के रिकॉर्ड में कई संदिग्ध वाहनों के नंबर दर्ज किए गए थे। एक ही दिन में एक वाहन द्वारा उज्जैन के चार चक्कर लगाने का रिकॉर्ड दिखाया गया।
जांच के दौरान ट्रकों की जगह 55 कारों के नंबर मिले। इसके अलावा कई जगह ट्रक की जगह पिकअप वैन के नंबर दर्ज किए गए थे। जांच में 44 वाहनों के रजिस्ट्रेशन फर्जी पाए गए।
क्षमता से चार गुना ज्यादा लोड दिखाया
मामले में एक और गंभीर गड़बड़ी सामने आई। जांच के दौरान 121 ऐसे वाहन मिले, जिनकी वास्तविक लोडिंग क्षमता से करीब चार गुना ज्यादा धान का परिवहन रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था।
इन तमाम अनियमितताओं के बाद हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अब प्रदेश के सभी जिलों में इसी तरह की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के आदेश के बाद धान खरीदी, परिवहन और मिलिंग से जुड़े रिकॉर्ड की जांच का दायरा पूरे मध्य प्रदेश तक बढ़ गया है।



