दिल्ली में राहुल गांधी की महारैली से 20 बाजारों पर संकट, व्यापारियों ने दिवाली बाद आयोजन की मांग की

दिल्ली में 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित कांग्रेस की महारैली को लेकर व्यापारियों ने चिंता जताई है। व्यापारियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर रैली को दिवाली के बाद आयोजित करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि रैली में करीब 10 लाख लोगों के शामिल होने की संभावना है। इससे पुरानी दिल्ली के 20 प्रमुख थोक और खुदरा बाजारों में कारोबार प्रभावित हो सकता है।
लाखों लोगों की भीड़ और हजारों वाहनों से जाम की आशंका
CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, रैली में देशभर से लोगों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। संगठन के अनुमान के अनुसार, लोगों को लाने के लिए 10 से 12 हजार बड़ी बसें और 5 से 7 हजार छोटी गाड़ियां दिल्ली पहुंच सकती हैं। इस तरह कुल वाहनों की संख्या 15 से 20 हजार तक होने का अनुमान है।
व्यापारियों का सवाल है कि इतने वाहनों की पार्किंग कहां होगी, क्योंकि रामलीला मैदान के आसपास पर्याप्त अधिकृत पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। उन्हें यह भी आशंका है कि 31 अक्टूबर से बैरिकेडिंग और रास्ते बंद होने के कारण बाजारों तक ग्राहकों की पहुंच मुश्किल हो सकती है। इससे त्योहार के व्यस्त कारोबारी सीजन में बिक्री प्रभावित होने का डर है।
पुरानी दिल्ली के 20 प्रमुख बाजारों पर असर की आशंका
रामलीला मैदान के आसपास चांदनी चौक, भागीरथ पैलेस, खारी बावली, सदर बाजार, चावड़ी बाजार, कश्मीरी गेट, नबी करीम, करोल बाग, अजमेरी गेट, दरियागंज, नई सड़क, किनारी बाजार, दरीबा कलां, फतेहपुरी, लाहौरी गेट, फिल्मिस्तान, पहाड़गंज, गफ्फार मार्केट, जामा मस्जिद का मीना बाजार और लाल किला क्षेत्र का लाजपत राय मार्केट सहित 20 प्रमुख बाजार हैं। इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स, मसाले, सूखे मेवे, किताबें, आभूषण, ऑटो पार्ट्स और मशीनरी का बड़ा कारोबार होता है।
CTI का दावा है कि 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भी सेंट्रल दिल्ली में यातायात और कारोबार प्रभावित हुआ था। संगठन के अनुसार, उस कार्यक्रम से व्यापारियों को करीब 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। व्यापारियों ने आशंका जताई है कि 1 नवंबर को प्रस्तावित महारैली के कारण नुकसान बढ़कर 10 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
CTI ने रखे दो विकल्प
व्यापारियों ने राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। CTI ने मांग की है कि जनहित और व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए महारैली को 10 नवंबर यानी भाई दूज के बाद आयोजित किया जाए।
संगठन का दूसरा सुझाव है कि यदि रैली 1 नवंबर को ही आयोजित करनी जरूरी है, तो इसे रामलीला मैदान के बजाय बुराड़ी ग्राउंड या जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम जैसे बड़े स्थान पर आयोजित किया जाए। व्यापारियों का कहना है कि इससे बाजारों में यातायात की समस्या कम होगी और दिवाली के दौरान कारोबार पर पड़ने वाले संभावित असर को रोका जा सकेगा।



