क्षेत्रीय दलों को 2024-25 में मिला 1,051 करोड़ का चंदा, एक साल में 198% बढ़ा; DMK-TMC समेत 8 पार्टियां आगे

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की 6 अगस्त को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में देश की प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियों को 20 हजार रुपये से अधिक के घोषित चंदे के तौर पर कुल 1,051.56 करोड़ रुपये मिले। यह रकम 2023-24 में मिले 347.69 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 198 प्रतिशत अधिक है। चंदे की संख्या भी 2,861 से बढ़कर 5,297 हो गई, यानी इसमें करीब 85 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
ADR के आंकड़ों के अनुसार, 8 प्रमुख क्षेत्रीय दलों ने 2024-25 में चंदा जुटाने के मामले में BJP और कांग्रेस को छोड़कर बाकी राष्ट्रीय पार्टियों को पीछे छोड़ दिया। इनमें DMK, तृणमूल कांग्रेस, YSR कांग्रेस, TDP और AIADMK प्रमुख हैं। सिर्फ इन पांच दलों को कुल 840.12 करोड़ रुपये का चंदा मिला, जो क्षेत्रीय दलों को मिले कुल चंदे का करीब 79.9 प्रतिशत है।
कॉर्पोरेट घरानों से मिला सबसे ज्यादा पैसा
रिपोर्ट के मुताबिक, क्षेत्रीय दलों को मिले कुल चंदे में 61.33 प्रतिशत यानी करीब 644.93 करोड़ रुपये कॉर्पोरेट और व्यापारिक घरानों से आए। प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट ने 2024-25 में क्षेत्रीय दलों को 253.50 करोड़ रुपये दिए। वहीं टाइगर एसोसिएट्स ने पांच किस्तों में 160 करोड़ रुपये का योगदान दिया।
क्षेत्रीय दलों को सबसे ज्यादा चंदा दिल्ली से 433.77 करोड़ रुपये, पश्चिम बंगाल से 172.93 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र से 158.80 करोड़ रुपये मिला।
अज्ञात दानकर्ताओं से मिले करोड़ों रुपये
ADR की रिपोर्ट में राजनीतिक चंदे की पारदर्शिता को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। 2023-24 में अज्ञात दानकर्ताओं से क्षेत्रीय दलों को 6.62 करोड़ रुपये मिले थे, जो 2024-25 में बढ़कर 302.67 करोड़ रुपये हो गए। यानी इसमें करीब 4,470 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
इसी तरह नकद चंदा भी 6.54 करोड़ रुपये से बढ़कर 301.44 करोड़ रुपये हो गया। बिना PAN विवरण वाले चंदे में भी बड़ा इजाफा हुआ और यह 7.68 करोड़ रुपये से बढ़कर 329.58 करोड़ रुपये पहुंच गया।
DMK को सबसे ज्यादा चंदा
तमिलनाडु की DMK ने 2024-25 में क्षेत्रीय दलों के बीच सबसे ज्यादा 365.78 करोड़ रुपये का चंदा जुटाया। रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें से 300.64 करोड़ रुपये ऐसे दानकर्ताओं से मिले, जिनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई। यह DMK को मिले कुल चंदे का करीब 82 प्रतिशत है।
तृणमूल कांग्रेस को 184.96 करोड़ रुपये मिले, जिसमें 184.08 करोड़ रुपये चेक या डिमांड ड्राफ्ट के जरिए आए। हालांकि, इन दानकर्ताओं की जानकारी में पता या PAN जैसी जानकारियां अधूरी थीं।
33 क्षेत्रीय दलों ने नहीं दी चंदे की रिपोर्ट
ADR के मुताबिक, देश की 67 मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय पार्टियों में से 33 ने रिपोर्ट तैयार होने तक चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपनी चंदे की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई थी। इनमें जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस, असम गण परिषद, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट, टिपरा मोथा और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक जैसी पार्टियां शामिल हैं।
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि क्षेत्रीय दलों की आर्थिक ताकत तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अज्ञात दान, नकद चंदे और अधूरी दानकर्ता जानकारी ने राजनीतिक फंडिंग की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल भी खड़े किए हैं।



