इंदौर में दिव्यांगजनों ने निकाली भव्य तिरंगा यात्रा, व्हीलचेयर के पहियों पर दिखा देशभक्ति का जज्बा

इंदौर। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इंदौर में दिव्यांगजनों की एक भावुक और प्रेरणादायी तिरंगा यात्रा निकाली गई। संस्था सार्थक की ओर से आयोजित इस यात्रा में बड़ी संख्या में दिव्यांग भाई-बहन व्हीलचेयर पर शामिल हुए। हाथों में तिरंगा थामे जब वे शहर की सड़कों से गुजरे तो यात्रा ने समाज को मजबूत संदेश दिया कि शारीरिक सीमाएं किसी के हौसले और देशभक्ति को नहीं रोक सकतीं।
कोठारी मार्केट पार्किंग से शुरू हुई यह तिरंगा यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए गांधी हॉल पहुंची, जहां राष्ट्रगान के साथ इसका समापन हुआ। पूरे रास्ते दिव्यांगजन हाथों में तिरंगा लेकर देश के प्रति अपना सम्मान और प्रेम जताते नजर आए।
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व्हीलचेयर के पहियों पर दौड़ी देशभक्ति
यात्रा का सबसे खास दृश्य व्हीलचेयर पर बैठे दिव्यांगजनों के हाथों में लहराता तिरंगा रहा। चेहरे पर मुस्कान और दिल में देशभक्ति का जज्बा लिए सभी प्रतिभागी आगे बढ़ते रहे। इस दृश्य ने दिव्यांगता को कमजोरी मानने वाली सोच को चुनौती दी।
यात्रा में शामिल लोगों ने अपने हौसले से संदेश दिया कि शरीर की सीमाएं हो सकती हैं, लेकिन सपनों, आत्मविश्वास और देश के प्रति प्रेम की कोई सीमा नहीं होती।
पद्मश्री सत्येंद्र सिंह लोहिया ने किया नेतृत्व
तिरंगा यात्रा का नेतृत्व पद्मश्री सत्येंद्र सिंह लोहिया ने किया। उनके साथ विभिन्न खेलों के पैरा खिलाड़ी, दिव्यांग उद्यमी और कला के क्षेत्र में पहचान बनाने वाले दिव्यांगजन भी शामिल हुए।
इस दौरान पैरा टेबल टेनिस की नेशनल खिलाड़ी और ऑल इंडिया रैंक 5 हर्षिता शहरी तथा ऑल इंडिया रैंक 10 भविष्य जैन भी मौजूद रहे। उनकी उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि सही अवसर और मजबूत हौसले के साथ दिव्यांगजन हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकते हैं।
सहानुभूति नहीं, सम्मान और बराबरी की जरूरत
संस्था सार्थक के अध्यक्ष दीपक जैन टीनू ने कहा कि दिव्यांगता किसी व्यक्ति की क्षमता को खत्म नहीं करती। उन्होंने कहा कि पैरा खिलाड़ी, दिव्यांग उद्यमी और अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे दिव्यांगजन लगातार अपनी प्रतिभा साबित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि तिरंगा यात्रा का उद्देश्य दिव्यांगजनों के प्रति केवल सहानुभूति जताना नहीं, बल्कि उन्हें सम्मान, समान अवसर और समान भागीदारी देने का संदेश देना है।
गांधी हॉल में राष्ट्रगान के साथ समापन
कोठारी मार्केट पार्किंग से शुरू हुई यात्रा गांधी हॉल पहुंची, जहां राष्ट्रगान के साथ इसका समापन हुआ। हाथों में तिरंगा लिए दिव्यांगजनों के चेहरों पर गर्व साफ नजर आया। यह पल भावुक होने के साथ-साथ प्रेरणादायी भी रहा।
संस्था सार्थक की यह पहल स्वतंत्रता दिवस के उत्सव से आगे बढ़कर सामाजिक संदेश बन गई। यात्रा में शामिल दिव्यांगजनों ने समाज को यह संदेश दिया कि उन्हें दया नहीं, बल्कि सम्मान और बराबरी की नजर से देखा जाना चाहिए।
इस तिरंगा यात्रा ने साबित कर दिया कि देश के लिए दिल में जज्बा हो, तो कदमों का साथ होना जरूरी नहीं।



