राज्योत्सव के बीच अंधेरे में डूबा अटल परिसर, 30 लाख की लागत से बना स्थल 10 महीने में बदहाल

आरंग। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के जश्न के बीच आरंग नगर पालिका क्षेत्र के कलई रोड स्थित ‘अटल परिसर’ बदहाली का शिकार है। एक ओर सरकारी इमारतें रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा रही हैं, वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ राज्य के स्वप्नद्रष्टा और भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा अंधेरे में खड़ी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बीते कई दिनों से पूरा परिसर अंधेरे में डूबा हुआ है, लेकिन राज्योत्सव की पूर्व संध्या पर भी प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने इसकी सुध नहीं ली।
30 लाख की लागत, 10 महीने में बदहाल
प्रदेश सरकार की पहल पर नगरीय निकायों में लाखों रुपये की लागत से अटल परिसर बनाए गए थे। आरंग में भी करीब 30 लाख रुपये खर्च कर इस परिसर का निर्माण और सौंदर्यीकरण कराया गया था। लेकिन स्थानीय लोगों के मुताबिक, निर्माण के महज 10 महीने के भीतर ही रखरखाव के अभाव में परिसर की स्थिति बदहाल हो गई है। आरोप है कि निर्माण के बाद जिम्मेदार विभागों ने इसकी देखरेख पर ध्यान देना बंद कर दिया।
जयंती और पुण्यतिथि पर ही याद आते हैं महापुरुष
नगरवासियों का कहना है कि महापुरुषों की प्रतिमाएं और उनके नाम पर बने परिसर अक्सर जयंती और पुण्यतिथि जैसे आयोजनों तक ही सीमित रह जाते हैं। इन अवसरों पर माल्यार्पण और फोटो खिंचवाने के कार्यक्रम होते हैं, लेकिन सालभर रखरखाव की अनदेखी होती रहती है।
लोगों का सवाल है कि जिस नेता ने छत्तीसगढ़ को अलग राज्य का दर्जा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उनकी प्रतिमा के सामने राज्योत्सव की पूर्व संध्या पर एक दीपक तक नहीं जलना आखिर किस तरह का सम्मान है?
नगरवासियों ने उठाए जवाबदेही पर सवाल
राज्योत्सव के अवसर पर अटल परिसर का अंधेरे में डूबा रहना स्थानीय लोगों को खटक रहा है। नगरवासियों ने सवाल उठाया है कि क्या लाखों रुपये खर्च कर परिसर बनाना ही जिम्मेदारों का काम था या उसके रखरखाव की भी कोई जवाबदेही तय है?
लोगों ने प्रशासन और नगर पालिका से परिसर में तत्काल प्रकाश व्यवस्था बहाल करने तथा उसकी साफ-सफाई और नियमित देखरेख सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि अटल बिहारी वाजपेयी का सम्मान केवल भाषणों और पोस्टरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनके नाम पर बने परिसर की स्थिति में भी दिखाई देना चाहिए।



