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TMC में ‘सिग्नेचर स्कैंडल’ से मचा बवाल, विधायकों के कथित फर्जी हस्ताक्षरों की CID जांच शुरू

दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों एक अनोखा विवाद सुर्खियों में है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) कथित ‘सिग्नेचर स्कैंडल’ को लेकर घिरती नजर आ रही है। मामला विपक्ष के नेता के चयन से जुड़े एक प्रस्ताव पर विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित गड़बड़ी का है। आरोप है कि कई विधायकों के हस्ताक्षर फर्जी तरीके से किए गए, जिसके बाद मामला पुलिस और सीआईडी जांच तक पहुंच गया है।

जानकारी के मुताबिक, विपक्ष के नेता के रूप में शोभनदेब चटर्जी  के नाम का समर्थन करने वाले एक प्रस्ताव पर करीब 70 विधायकों के हस्ताक्षर दिखाए गए थे। हालांकि बाद में कुछ विधायकों ने दावा किया कि उन्होंने ऐसे किसी प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इस खुलासे के बाद हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े हो गए।

हेयर स्ट्रीट थाना में दर्ज कराई शिकायत

मामले को गंभीरता से लेते हुए विधानसभा की ओर से कोलकाता के हेयर स्ट्रीट थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है। इसके बाद सीआईडी ने जांच शुरू कर दी है। जांच टीम हस्तलेखन विशेषज्ञों के साथ विभिन्न विधायकों के घर पहुंचकर उनके हस्ताक्षरों का मिलान कर रही है। सीआईडी और कोलकाता पुलिस संयुक्त रूप से पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं।

जांच के तहत कई प्रमुख नेताओं और विधायकों से संपर्क किया गया है। इनमें नयना बनर्जी, कुणाल घोष, बहारुल इस्लाम और चंद्रनाथ सिन्हा जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं। कैनिंग ईस्ट से विधायक बहारुल इस्लाम ने दावा किया है कि प्रस्ताव पर उनके हस्ताक्षर फर्जी तरीके से किए गए हैं।

ये राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश: शोभनदेब चटर्जी

दूसरी ओर, शोभनदेब चटर्जी ने इस पूरे विवाद को राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बताया है। उनका कहना है कि विधायकों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है।

विधानसभा चुनाव में हार के बाद पहले से ही राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही टीएमसी के लिए यह नया विवाद बड़ी परेशानी बनता जा रहा है। अब सभी की नजरें सीआईडी जांच की रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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