एयर इंडिया की फ्लाइट में टर्बुलेंस के पीछे तकनीकी खामी का शक, हाइड्रोलिक सिस्टम फेल और ऑटोपायलट हुआ था बंद

फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की A320 फ्लाइट में 4 अगस्त को हुई गंभीर टर्बुलेंस की घटना की जांच में कई तकनीकी गड़बड़ियां सामने आई हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक विमान का हाइड्रोलिक सिस्टम तीन बार फेल हुआ और ऑटोपायलट भी डिस्कनेक्ट हो गया था। इसके बाद को-पायलट ने मैनुअल तरीके से विमान का नियंत्रण संभाला। इस घटना में 13 यात्रियों और चार चालक दल के सदस्यों समेत कुल 17 लोग घायल हुए थे।
फ्लाइट AI2379 में 137 यात्री सवार थे, जिनमें तीन छोटे बच्चे भी शामिल थे। विमान में दो पायलट और छह केबिन क्रू सदस्य भी मौजूद थे। घटना के दौरान विमान को करीब पांच मिनट तक तेज झटकों का सामना करना पड़ा और विमान अचानक करीब 300 फीट नीचे आ गया था।
तकनीकी सिस्टम की जांच में जुटी टीमें
जांचकर्ताओं के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि हाइड्रोलिक सिस्टम की खराबी, ऑटोपायलट के डिस्कनेक्ट होने और अन्य तकनीकी चेतावनियों के बीच क्या कोई सीधा संबंध था। हाइड्रोलिक सिस्टम विमान के उड़ान नियंत्रण से जुड़े कई महत्वपूर्ण हिस्सों को संचालित करने में अहम भूमिका निभाता है।
मामले की जांच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो कर रहा है। जांच में विमान के तकनीकी सिस्टम, उड़ान से जुड़े आंकड़ों और कॉकपिट में हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग की जांच की जाएगी। फ्रांस की जांच एजेंसी BEA और विमान निर्माता एयरबस की टीमें भी जांच में तकनीकी सहायता देने के लिए भारत पहुंचने वाली हैं।
घटना को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने गंभीर घटना की श्रेणी में रखा है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि विमान अचानक नीचे क्यों आया और तकनीकी गड़बड़ियां किस क्रम में सामने आईं।
पायलट के डोप टेस्ट को लेकर भी उठे सवाल
घटना के बाद दोनों पायलटों का पोस्ट-फ्लाइट ड्रग स्क्रीनिंग टेस्ट कराया गया था। रिपोर्ट में दावा किया गया कि दोनों में से एक पायलट का टेस्ट पॉजिटिव आया है। हालांकि, एयर इंडिया ने इस दावे की पुष्टि या खंडन नहीं किया है। एयरलाइन के अनुसार, तय प्रोटोकॉल के तहत टेस्ट कराया गया था, लेकिन रिपोर्ट अभी उसके साथ साझा नहीं की गई है।
जांच पूरी होने तक दोनों पायलटों को ड्यूटी से हटाए जाने की जानकारी सामने आई है। एयरलाइन ने यह भी कहा कि नागरिक विमानन नियमों के तहत उसके क्रू सदस्यों का नियमित ड्रग टेस्ट किया जाता है।
अब जांच एजेंसियां तकनीकी खराबी और उड़ान के दौरान सामने आई अन्य परिस्थितियों के बीच संबंध तलाश रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विमान के अचानक नीचे आने की वास्तविक वजह क्या थी।



