धरती को एस्टेरॉयड से बचाने की दो बड़ी रणनीतियां: NASA का DART मिशन या चीन का न्यूक्लियर प्लान?

अगर भविष्य में कोई बड़ा एस्टेरॉयड पृथ्वी की ओर बढ़ता है, तो उससे बचाव कैसे होगा? इस सवाल का जवाब खोजने के लिए दुनिया दो अलग-अलग तकनीकों पर काम कर रही है। एक तरफ NASA का सफल DART मिशन है, जिसने एस्टेरॉयड का रास्ता बदलने की क्षमता साबित की है, वहीं दूसरी ओर चीन बड़े एस्टेरॉयड को परमाणु विस्फोट से रोकने की योजना पर काम कर रहा है।
NASA ने साल 2022 में DART मिशन के तहत एक अंतरिक्ष यान को जानबूझकर एस्टेरॉयड से टकराया था। इस प्रयोग से एस्टेरॉयड की गति और दिशा में हल्का बदलाव आया। यह तकनीक छोटे एस्टेरॉयड के लिए कारगर मानी जाती है।
वहीं, चीन के वैज्ञानिकों ने एक नया मॉडल तैयार किया है। इसके अनुसार पहले एक अंतरिक्ष यान एस्टेरॉयड की सतह में गहरा छेद करेगा और उसके बाद दूसरा यान उस छेद में परमाणु बम पहुंचाकर विस्फोट करेगा। कंप्यूटर परीक्षणों में दावा किया गया है कि यह तरीका बड़े एस्टेरॉयड का रास्ता बदलने या उन्हें नष्ट करने में DART मिशन से कहीं अधिक प्रभावी हो सकता है।
हालांकि, इस योजना के सामने कई चुनौतियां भी हैं। सबसे बड़ी चुनौती एस्टेरॉयड की समय रहते पहचान करना, भारी अंतरिक्ष यानों को लॉन्च करना और अंतरराष्ट्रीय कानून हैं। फिलहाल अंतरिक्ष में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है, इसलिए चीन की इस योजना को लागू करने के लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों में बदलाव की जरूरत होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल छोटे एस्टेरॉयड से बचाव के लिए NASA का DART मिशन सबसे भरोसेमंद तकनीक है। वहीं, अगर भविष्य में कोई बहुत बड़ा एस्टेरॉयड पृथ्वी के लिए खतरा बनता है, तो चीन जैसी परमाणु आधारित रणनीतियों पर भी विचार किया जा सकता है।

