काशी क्षेत्र की कमान अशोक चौरसिया को, BJP ने OBC समीकरणों पर खेला बड़ा दांव

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी नई प्रदेश और क्षेत्रीय संगठनात्मक नियुक्तियों में अशोक चौरसिया को काशी क्षेत्र का क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाया है। इसके साथ ही उन्हें 16 जिलों की 71 विधानसभा सीटों पर संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पिछले 12 वर्षों से क्षेत्रीय महामंत्री के रूप में काम कर चुके अशोक चौरसिया को संगठन का अनुभवी और जमीनी नेता माना जाता है।
काशी क्षेत्र में भाजपा ने संगठन की तीन प्रमुख इकाइयों की कमान पिछड़े वर्ग के नेताओं को सौंपकर स्पष्ट राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। प्रदीप अग्रहरी को महानगर इकाई और राम सकल पटेल को जिला संगठन की जिम्मेदारी दी गई है। अशोक चौरसिया की नियुक्ति के बाद काशी क्षेत्र में संगठन के शीर्ष पदों पर OBC नेतृत्व और मजबूत हुआ है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए OBC वोट बैंक को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। कुछ विश्लेषकों के अनुसार यह कदम समाजवादी पार्टी के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के जवाब के तौर पर भी देखा जा सकता है।
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग इसे केवल OBC राजनीति नहीं मानता। उनका कहना है कि भाजपा संगठनात्मक संतुलन बनाते हुए यह संदेश भी दे रही है कि नेतृत्व में पिछड़े वर्ग को आगे रखा जाएगा, जबकि परंपरागत सवर्ण समर्थन पार्टी की ताकत बना रहेगा।
वरिष्ठ पत्रकारों के अनुसार, बरई (चौरसिया) समाज भले ही पूर्वांचल में बहुत बड़ा वोट बैंक नहीं है, लेकिन छोटे-छोटे OBC समुदायों के बीच इसका प्रतीकात्मक प्रभाव पड़ सकता है। लोकसभा चुनाव में भाजपा से दूर हुए कुछ छोटे पिछड़े वर्गों के वोटों को वापस जोड़ने की कोशिश के रूप में भी इस फैसले को देखा जा रहा है।
संगठन में लंबे अनुभव और बूथ स्तर तक मजबूत पकड़ रखने वाले अशोक चौरसिया के सामने अब काशी क्षेत्र में भाजपा को 2027 की चुनावी तैयारी के लिए और मजबूत करने की बड़ी चुनौती होगी।

