वंदे मातरम् पर नया कानून: क्या अब पूरे 6 छंद गाना जरूरी, जानें नियम और सजा

राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को लेकर राजनीतिक बहस के बीच इसके कानूनी प्रावधानों पर भी चर्चा तेज हो गई है। जुलाई 2026 में राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम में किए गए संशोधन के बाद वंदे मातरम् को राष्ट्रगान, राष्ट्रीय ध्वज और संविधान की तरह कानूनी संरक्षण दिए जाने की बात सामने आई है। इसके बाद गीत के गायन, इसमें बदलाव और कार्यक्रमों में बाधा डालने को लेकर नियमों पर सवाल उठ रहे हैं।
क्या पूरे 6 छंद गाना अनिवार्य है?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार वंदे मातरम् के मूल संस्करण में छह छंद हैं और गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों में इसके पूर्ण संस्करण के गायन या वादन की अवधि 3 मिनट 10 सेकंड निर्धारित बताई गई है। कानून के तहत जानबूझकर राष्ट्रीय गीत के गायन को रोकना या उसके दौरान सभा में बाधा डालना दंडनीय अपराध माना गया है।
हालांकि, इस विषय को लेकर यह अंतर समझना जरूरी है कि कानून राष्ट्रीय गीत के अपमान या उसके गायन में जानबूझकर बाधा डालने को दंडनीय बनाता है। केवल किसी कार्यक्रम में गीत के किसी निर्धारित संस्करण के बजाय छोटा संस्करण प्रस्तुत करने को लेकर कानूनी स्थिति संबंधित नियमों और परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
वंदे मातरम् का इतिहास और विवाद
वंदे मातरम् की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 19वीं सदी में की थी। इसे बाद में उनके उपन्यास आनंदमठ में शामिल किया गया। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत राष्ट्रवादी भावना का महत्वपूर्ण प्रतीक बना।
1937 में कांग्रेस ने इसके शुरुआती दो छंदों को स्वीकार किया था। इसके पीछे मूल रचना के बाद के हिस्सों को लेकर राजनीतिक और साम्प्रदायिक मतभेदों को प्रमुख कारण माना गया था। यही वजह है कि लंबे समय से सार्वजनिक कार्यक्रमों में आमतौर पर इसके शुरुआती हिस्से ही गाए जाते रहे हैं।
1950 में संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने वंदे मातरम् को राष्ट्रगान जन गण मन के समान सम्मान दिए जाने की घोषणा की थी। इसके बावजूद लंबे समय तक इसके गायन की अवधि और छंदों को लेकर कोई समान कानूनी व्यवस्था नहीं थी।
2026 के संशोधन के बाद वंदे मातरम् को कानूनी संरक्षण मिलने से इसके सार्वजनिक गायन को लेकर नियमों की अहमियत बढ़ गई है। जानबूझकर गीत के गायन में बाधा डालने या उसे रोकने की स्थिति में कानून के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। उपलब्ध विवरण के अनुसार ऐसे अपराध में तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।



